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श्री राम के जैसा

 श्री राम के जैसा बनो राम के जैसा,  यदि ईश्वर को पाना है,, श्री राम के हम सब हैं,  उन्हें दिल में बसाना है,, दुनिया के पाखंडों में,  श्री रा...

रविवार, 21 जनवरी 2024

श्री राम के जैसा

 श्री राम के जैसा


बनो राम के जैसा, 

यदि ईश्वर को पाना है,,

श्री राम के हम सब हैं,

 उन्हें दिल में बसाना है,,

दुनिया के पाखंडों में,

 श्री राम नहीं बसते,,

इस मूर्खता को देख,

 सभी ज्ञानी पुरुष हंसते,,

छल कपटी अंधेरों को, 

हर दिल से मिटाना है,,

श्री राम के हम सब हैं,

 उन्हें दिल में बसाना है।.......


माता की आज्ञा से,

 वनवास को धाये थे,,

भ्राता और पत्नी संग,

 निज धर्म निभाएं थे,,

मां अहिल्या को तारा,

 और तारा जमाना है,,

श्री राम के हम सब हैं,

 उन्हें दिल में बसाना है।.......


शबरी के झूठे बेर,

बड़े प्रेम से खाए थे,,

ना घमंड किया कोई,

वह एक राजा के जाए थे,,

न जाति धर्म कोई, 

सबको एक ही माना है,,

श्री राम के हम सब हैं,

उन्हें दिल में बसाना है।.......


प्रभु ने मेहनत करके,

इस सृष्टि को सींचा है,,

श्री राम की आशाओं का,

यह शुद्ध बगीचा है,,

सुनील कुमार विनती करते,

अब अयोध्या हमको जाना है,,

श्री राम के हम सब हैं,

 उन्हें दिल में बसाना है।........


🙏🙏सादर अर्पित🙏🙏

🙏🙏सुनील कुमार🙏🙏

शनिवार, 7 अगस्त 2021

 चंद पंक्तियाँ अर्पित कर रहा हूँ, उस नन्ही सी परी के लिए जो आज अपनों के संग नहीं है, मेरी विनती है देश के महामहीम जी से। आशा है आप मेरी व्यथा को समझने में मेरी मदत करेंगे, मेरा मन बहुत ही विचिलित हो रहा था कुछ कहने को , अगर मेरे द्वारा कहे गए शब्द किसी को ठेस पहुंचाते हैं तो में छमा का पात्र हूँ।🙏🙏


🙏🙏प्रार्थना🙏🙏


क्यों हो रहे अत्याचार,

बताओ ना मोदी जी,,

समझाओ न मोदी जी,

कुछ अपने दिल की बात,

 सुनाओ न मोदी जी,,....


मां - बहनों की जिंदगी,

खतरे में पड़ी हुई,,

मेंहगाई की मार इस,

 आकाश में चढ़ी हुई,,

भारत की जनता को पार,

लगाओ ना मोदी जी,,.....


जातियवाद धर्म के बोझ से दबते ही आये हैं,

भ्रस्टाचार की चक्की में पिसते ही आये हैं,,

इन पापी और गद्दारों से बचाओ न मोदी जी,, क्यों हो रहे...


ये लाचार समाज अब तक सोता आया है,

इन पर अत्याचार अबतक होता आया है,,

इस पुराने इतिहास को न जगाओ मोदी जी,,

आल्हा की रखी तलवार को न उठाओ मोदी जी, 

कुछ समझाओ मोदी जी,,

 क्यों हो रहे अत्याचार बताओ न मोदी जी.....


पैसों के बल से तोल रहे, दीनों की इज्जत को,,

इज्जत का न कोई मोल है, रोको इस बेइज्जती को,,

इस मानवता में दाग न लगवाओ मोदी जी,,

उन पापियों को फांसी पर चढ़ाओ मोदी जी,,

क्यों हो रहे अत्याचार, बताओ ना मोदी जी,,......


ये सुनील हाथ जोड़ विनती करता है,

राजा का आप स्वरूप  जो न्याय करता है,,

इन माँ- बहनों के दरिंदो को दंड दिलाओ मोदी जी,,

सुनील कुमार की प्रार्थना ना ठुकराओ मोदी जी,,

क्यों हो रहे अत्याचार जरा समझाओ मोदी जी।......


🙏🙏सादर निवेदित🙏🙏

            सुनील कुमार

रविवार, 12 जुलाई 2020

बुराई का प्रतीक विकाश दुबे

कंटीली झाड़ियों से बचना ही बेहतर है,
त्याग दो ऐसी राहों को जहाँ चलना भी मुश्किल है,,
मजा पाने के लिये सजा अनिवार्य है प्यारे,
मौत जब आ ही गयी द्वारे समय टालना भी मुश्किल है।........

कर्म करने से पहले जरा सोचो और समझो,
कहीं गलती ना हो जाये, कार्य को टालना चहिये,,
बिना सोचे ही लालचवश कदम को रोकना वाजिब,
कदम रखते डगमगा जाये, अपने को सम्हलना चहिये।.........

ये पेटा ना भरा ना भर रहा, ना कभी भरते देखा है,
समझ यदि अपने अंदर हो, कभी ना कर्म से बिचले,,
रुलाकर क्यों हंसते हो महफ़िल में, वो ऊपर वाला देख रहा,
क्यों दौलत पे मरते हो ना दौलत साथी बनी पगले।..........

नांस क्यों कर रहे अपना जरा बच्चों की तरफ देखो,
ये दुनियाँ बहुत ही जालिम तुझे जड़ से मिटा देगी,,
ये नाजुक तन और मन तेरा क्यों इसको व्यर्था दुःख देते,
पाप की एक ही चिंगारी तुझे पल में जला देगी।..........

विश्व के झूठे रिस्ते-नाते सभी मतलव के साथी है,
विपति में देख छुप जाते कोई भी साथ नहीं देता,,
यदि छोड़ दे मोह माया को ईश्वर पर भार छोड़ अपना,
वही सच्चा एक सेवक है, भंवर में डूबने ना देता।........

ये गाथा विकाश दुबे पर है, जिसने ना सोचा और नहीं समझा,
ढह गये महल काँटों के आप सुख की निंदिया सोये,,
धर्म के कार्य किये होते दुर्दशा ना होती इनकी,
बुराई रह गई जग में, सुनील कविता में व्यंग बोये।.........

सादर अर्पित।
सुनील कुमार





शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

कुछ पंक्तियाँ निवेदित कर रहा हूँ, आशा है कि आप सभी का स्नेह व आशीर्वाद मिलेगा।

                साँड़

पैदा हो गया साँड़, निरंकुश घूमे वन में,
करै मनमानी काम ना चिंता उसके मन में,,

माँ-बाप और परिवारी जनों ने अच्छा समझा,
किये सदां ही कार्य सफलता धन- दौलत में,,......

करि माया अभिमान नसे में मस्त वो रहता,
बना बड़ा बदमाश कि कोई कुछ नहीं कहता,,

दस बीघा में आवास, कोठियां बनाई न्यारी,
भय का बना दवाब, समाज सब दुःख सहता,,....

कितने हत्याकांड कोई कुछ ना कर पाया,
भरा पाप का घड़ा, अंत तेजी से आया,,

सभी दलों ने उसको अब तक सीस झुकाया,
हुआ भाजपा राज उसको वहुबिधि समझाया,,....

अंत समय जब आयेगा, बुद्धि फिर जाती है,
कितने दो उपदेश समझ ना कुछ आती है,,

बढ़े पाप का वजन कि पृथ्वी घबराती है,
पापी का अंत करने में ना फिर सकुचाती है,,.........

गिरफ्तारी वारेंट दिया पहले भिजवाई,
जंगली साँड़ को पकड़ने पुलिस उसके घर आई,,

नहीं माना फिर भी साँड़ आतंकी हाथ दिखाया,
आठ पुलिस वालों को पल में मार गिराया,,.......

योगी ने की छापे मारी, उसका महल गिराया,
भाग गया वो साँड़ पुलिस के हाथ ना आया,,

करि के छापेमारी साँड़ के सहकर्मी मारे,
महाकाल के उज्जैन में साँड़ फंस गये विचारे,,.......

किया तुरंत गिरफ्तार साँड़ को मार गिराया,
एनकाउंटर का नाम पुलिस ने खुद दर्शाया,,

नेताओं में सियासत होने लगी भारी,
कहां पलटी कार सवाल पै सवाल निकारी,,......

क्या धन-दौलत साथ ले गया, क्या सुखी परिवार रहा,
रह गई बुराई पृथ्वी पर, बिना मौत मारा गया,,

हाथ जोड़ कर करूँ विनती, मतना ऐसा काम करो,
इंसानियत रूपी कर्म करो,
सुनील की कविता का नाम करो,,.....

जय हिंद।

🙏🙏सादर अर्पित🙏🙏
सुनील कुमार

मंगलवार, 7 जुलाई 2020

पक्षी का रहस्य

आज में पक्षी के रहस्यमई रूप का वर्णन करने की कोसिस कर रहा हूँ, आशा करता हूं, आपका स्नेह, आशीर्वाद अर्जित कर सकूं।

         पक्षी का रहस्य

विचित्र रहस्य पक्षी मन बसि हैं,
धूप, छांव, भूख, प्यास सब तजि हैं,,

मेहनत कस तन, मन हि बनावहिं,
लक्ष्य निरखि मानव हिय लजि हैं,,

ताकी लगन अनौखी शान,
श्रेष्ठ बुलंदी लखि असमान,,.....

श्याम, गौर का भेद न ताके,
विकल, विफल नहिं उर बसि जाके,,

भक्ति, भावना श्रेष्ठ सुहाइहिं,
नित्य नेम गुड़गान भगवां के,,

ना छल-कपटी राग अरु तान,
श्रेष्ठ बुलन्दी लखि असमान,,.....

दिवस जाइ और रैन बितावै,
खा फल फुलहिं मौज उड़ावै,,

भोर होइहि मानव को जगाते,
अपने स्वर में सब बतलाते,,

इत-उत भरते मधुर उड़ान,
श्रेष्ठ बुलन्दी लखि असमान,,......

चारों दिश कौलाहल सोहे,
ताकी ध्वनि अंतर्मन मोहे,,

कोई राग सुरीला गावै,
कोई कांव, कांव चिल्लावै,,

पीहुँ, पीहुँ कर गाइ पपैया,
चातक, मोर सुंदर कोयलियाँ,,

इनकी महिमा अति महान,
श्रेष्ठ बुलन्दी लखि असमान,,.....

दादुर टर्र, टर्र करि गावै,
लाखों भाषा में स्वर पावै,,

मन मोहक है अजब कहानी,
आलस त्याग बने बरदानी,,

सुनील कुमार कथि सार ही शान,
श्रेष्ठ बुलन्दी अति स्वर्ग की खान,,...

🙏🙏सादर अर्पित।🙏🙏
सुनील कुमार

रविवार, 5 जुलाई 2020

गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा नहीं सिखाता,
अंधकार में ठोकर खाना,,
शास्त्रों में विख्यात गुरु को,
ज्ञान का दीप जलाना,,

कुछ अज्ञानी तत्व, गुरु को समझ ना पाये,
रचे बहुत पाखंड, धाम लाखों बनवाये,,

इक ईश्वर को आज हजारों में बांटा जाता,
करें मतलवी प्यार, विश्व मे झूठा नाता,,

दीन, हीन, भुखमरी से  जनता आज मर रही,
मंदिरों में अरबों का दान, बोरियाँ रोज भर रहीं,,

करै दिखावा गुरु, शिष्य का समझ ना आता,
गुरु पूर्णिमा का पर्व अंधी भटकान मिटाता,,

मत करो शास्त्र बदनाम, गुरु को ना दाग लगाओ,
सुनील कुमार का कथन सभी अंधकार मिटाओ,,.......

🙏🙏सादर अर्पित।🙏🙏

सुनील कुमार।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

🙏में देश नहीं झुकने दूंगा🙏

मैं देश नहीं झुकने दूंगा,
मैं देश नहीं रुकने दूंगा,,

संकट पे महा संकट आये,
मैं बढ़े कदम ना हटने दूंगा,,......

हम लड़ते रहे हैं, लड़ते रहेंगे,
उठे कदम सदां बढ़ते रहेंगे,,

भूख, प्यास सह लेंगे तन पर,
दुश्मन के सामने अड़ते रहेंगे,,.....

वीर हमारे गौरवशाली,
जिनके बल से छाई खुशहाली,,

सीमा पर लहराए तिरंगा,
गूंजे जय हिंद ध्वनि निराली,,......

ये देश बटा ना बटने दूंगा,
निरर्थक सिर ना कटने दूंगा,,

सभी भारतीयों का एक ही सपना,
मैं देश नहीं झुकने दूंगा,,......

खून पसीने की कमाई,
व्यर्थ नहीं जाने पाये,,

अपने देश का पैसा केवल,
अपने ही देश में काम आये,,....

पराधीनता त्यागो भाई,
आत्म निर्भरता लो अपनायी,,

सुनील कुमार की चली कलम को,
कभी नहीं रुकने दूंगा,,

मैं देश नहीं झुकने दूंगा,
मैं देश नहीं रुकने दूंगा,,......

🙏सादर अर्पित।🙏
सुनील कुमार