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दीपावली🪔
दिवाली का त्योहार है आया
घर-घर दीप जला लो
साफ-सफाई घर की कर लो
और मिठाई खा लो ।
भूल न जाना उनको जिनको
तुमसे आस लगी है
उनके घर भी दीपक रख दो
जग रोशन जिनसे हुई है।
प्राची में अरुणिमा को देखो
सूरज जब बाहर आता है
रोके किसी के नहीं रुकता
पूरी दुनियाँ में छा जाता है।
परछाई सोचे रोक लिया पर
कुछ ही क्षण की बात है
सूरज के आगे अंधेरों की
कहाँ इतनी औकात है।
जगमग धरती हो जाती है
आती रोज दिवाली
एक अकेला ही सदियों से
कर रहा है रखवाली।
आओ दीप जलाकर कर दें
रोशन कोना-कोना
छँट जाए घनघोर अंधेरा
पड़े उदास न होना।
अंतरतम का नेह निकाल
बुझी बाती है सुलगाना
तेल दीया में रहेगा जब तक
तब तक है प्रकाश फैलाना ।
(दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर समर्पित)
सुनील कुमार💐🙏🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
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