नव वर्ष
यह नववर्ष का हर्ष है
इस हर्ष का उत्कर्ष है
जोश, उमंग, उत्साह का
हो रहा अद्भुत स्पर्श है ।
कल क्या होगा, है नहीं पता
जो न सोचा, हो जाता है
पर वीर अधीर नहीं होता
वह राह नया दिखलाता है ।
जीवन तो एक संघर्ष है
खुब किया विचार-विमर्श है
तब निकला यह निष्कर्ष है
संघर्ष स्वीकार सहर्ष है ।
अनुभव जीवन का गहना है
सुख-दुख में हाथ बंटाता है
अनुभव को तजकर दुनिया में
कुछ हासिल नहीं कर पाता है ।
माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग
अनुभव का एक खजाना है
जिसके सर इनका साया हो
वह नहीं कभी भी पराया हो ।
जो बोझिल करते थे मन को
मन व्यथित विचलित हो जाता था
सोचने की नजरिया जब बदला
मुश्किल को आसान बना डाला।
नव वर्ष से सभी को उम्मीदें
है हमको भी और तुमको भी
जो कहते नहीं हैं, मौन सदा
है लगी उम्मीदें, उनको भी ।
सब भाव भरें अंतर्मन में
जन-जन के जन कल्याण का
नव वर्ष में नव निर्माण का
विश्व गुरु भारत महान का ।
(नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, स्वरचित रचना सादर समर्पित)
सुनील कुमार💐👏🍏🇮🇳🙏🏼